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October 15, 2019

दण्ड यातायात नियम तोड़ने पर तो टूटी सड़कों पर क्यों नहीं?

राजेश शर्मा

कहते हैं ,दण्ड का उद्देश्य सुधार होता हैं और शायद इस उक्ति के आधार पर ही मोटर यान अधिनियम 2019 आज लागू हो गया हैं, अच्छा हो इसके परिणाम स्वरूप जनता की जान सुरक्षित रहें
इसका समर्थन जरूर किया जाना चाहिए लेकिन इस अधिनियम के अंतर्गत वसूले जाने वाला दण्ड भारत जैसे देश मे इतना ज्यादा हैं कि लगता हैं ये आने वाले समय मे जनता के लिए बहुत भारी पड़ने वाला हैं।जिस देश मे प्रतिव्यक्ति औसत आय 10335 रुपये हो ऐसे में दण्ड के रूप में 500 रुपये से 25000 तक वसूले जाने का प्रावधान हैं ये बिल्कुल अनुचित हैं,

जँहा एक ओर यदि हेलमेट का न पहन ना ,दुपहिया वाहनों पर तीन सवारी का बैठना, ओवरलोड,सीट बेल्ट,का न होना दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण है,तो दूसरी ओर सड़को पर गड्ढों की मौजूदगी, भी दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण हैं।सड़को पर अतिक्रमण करने वाले लोगो ओर घटिया सड़क बनाने वाले ठेकेदार व उनसे कमीशन वसूलने वाले जनप्रतिंनिधि ,सरकारी इंजीनयर सहित कार्यदायी संस्था के साथ सब लोग जो किसी न किसी रूप में भर्ष्टाचार का हिस्सा रहे ,उनके लिए भी दिए जाने वाले दण्ड को कठोर कर दिया जाता तो लगता की सरकार सड़क दुर्घटनाओं को लेकर गंभीर हैं, भारत सरकार को चाहिए की वह सड़को के गड्ढों व अतिक्रमण से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए भी कोई एक्शन प्लान जनता के सामने रखे।तो अब प्रश्न यही उठता है कि यदि दण्ड यातायात नियम तोड़ने पर तो टूटी सड़कों पर क्यों नहीं?

admin

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